Follow Us:

धनतेरस 6 नवंबर को, जानें क्या खरीदने से घर में बरसेगी लक्ष्मी की कृपा

➤ धनतेरस 6 नवंबर को, सोना-चांदी और पीतल के बर्तन खरीदना माना जाता है शुभ

➤ 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे शुरू होगी त्रयोदशी तिथि, 7 नवंबर सुबह 10:57 बजे समापन

➤ शिमला के बाजारों में सजीं दुकानें, धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की होगी पूजा



शिमला। दीपावली की रौनक शुरू होने से पहले ही बाजारों में एक खास दिन का इंतजार बढ़ने लगा है। यह दिन है धनतेरस का, जब लोग केवल खरीदारी ही नहीं करते, बल्कि अपने घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ नई वस्तुओं का स्वागत भी करते हैं। इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है और किन वस्तुओं को घर लाने की परंपरा रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीतल के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन घर में नई धातु की वस्तुएं लाने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि होती है। कई परिवार इस अवसर पर सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, चांदी के बर्तन और पीतल के घरेलू सामान खरीदना पसंद करते हैं। वहीं अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार लोग अन्य उपयोगी घरेलू वस्तुओं की खरीदारी भी करते हैं। इस परंपरा के पीछे समृद्धि और शुभ शुरुआत की भावना जुड़ी हुई है।

धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता, माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी तथा कुबेर को धन का अधिपति माना गया है। श्रद्धालु पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

राजधानी शिमला के गंज बाजार स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और इसका समापन 7 नवंबर को सुबह 10:57 बजे होगा। उन्होंने बताया कि धनतेरस पर नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खरीदारी करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

धनतेरस को लेकर शिमला के बाजारों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। आभूषणों की दुकानों से लेकर बर्तन विक्रेताओं तक ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपने प्रतिष्ठानों को सजाना शुरू कर दिया है। सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों और पीतल के बर्तनों की आकर्षक सजावट बाजारों की रौनक बढ़ा रही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि धनतेरस के अवसर पर खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में ग्राहक बाजारों का रुख करेंगे। वहीं लोग भी अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी की योजना बना रहे हैं।

धनतेरस केवल सोना-चांदी या महंगी वस्तुएं खरीदने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पर्व नई शुरुआत, स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से भी जुड़ा है। यही वजह है कि आर्थिक स्थिति के अनुसार छोटी से छोटी नई वस्तु खरीदकर भी लोग इस दिन को विशेष बनाते हैं। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा धनतेरस हर वर्ष दीपावली के उत्सव को एक नई शुरुआत देता है। इस बार भी 6 नवंबर को बाजारों की रौनक और घरों में पूजा-अर्चना के साथ इस पर्व को मनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

खरीदारी से पहले ध्यान रखें: त्योहारी सीजन में भीड़ का फायदा उठाकर ठगी के मामले बढ़ जाते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। सोना या चांदी खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID नंबर जरूर जांचें और दुकानदार से पक्का बिल लें, जिसमें वजन, शुद्धता और कीमत दर्ज हो। बहुत सस्ते ऑफर या एडवांस बुकिंग के लालच में न आएं। ऑनलाइन खरीदारी करते समय केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म चुनें और किसी अनजान लिंक या कॉल पर OTP, UPI पिन या बैंक जानकारी साझा न करें। बजट से बाहर जाकर कर्ज लेकर खरीदारी करने से बचें, क्योंकि परंपरा के अनुसार शुभता श्रद्धा और सामर्थ्य से जुड़ी है, खर्च की मात्रा से नहीं।

सेहत और सुरक्षा का भी रखें ध्यान: धनतेरस को आरोग्य के देवता धन्वंतरि से जोड़ा जाता है, इसलिए त्योहार में मिलावटी मिठाई और खोये से बचें और खरीदते समय गुणवत्ता व तारीख जरूर देखें। घर में दीये और मोमबत्तियां जलाते समय बच्चों और पर्दों, सजावटी सामान से दूरी का ध्यान रखें, ताकि आग जैसी दुर्घटना से बचा जा सके। पूजा की सही विधि और मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पुरोहित या पंडित से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।